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आज पुरानी राहों से लिरिक्स | सोनू निगम, आदमी (1968)

आज पुरानी राहों से कोई
मुझे आवाज न दे
आज पुरानी राहों से कोई
मुझे आवाज न दे
दर्द में डूबे गीत न दे
ग़म का सिसकता साज न दे
दर्द में डूबे गीत न दे
ग़म का सिसकता साज न दे

बीते दिनों की याद थी जिनमे
मैं वह तराने भूल चूका
आज नयी मंजिल है मेरी
कल के ठिकाने भूल चूका
न वह दिल ना सनम
न वह दिन धरम
अब्ब दूर हूँ सारे गुनाहों से
आज पुरानी राहों से कोई
मुझे आवाज न दे

टूट चुके सब प्यार के
बंधन आज कोई जंजीर नहीं
शीशा-इ-दिल में अरमानों
की आज कोई तस्वीर नहीं
अब्ब शाद हूँ मैं
आज़ाद हूँ मैं
कुछ काम नहीं है आहो से
आज पुरानी राहों से कोई
मुझे आवाज न दे
दर्द में डूबे गीत न दे
ग़म का सिसकता साज न दे

जीवन बदला दुनिया बदली
मनन को अनोखा ज्ञान मिला
आज मुझे अपने ही दिल में
एक नया इंसान मिला
पहुँचा हूँ वहाँ
नहीं दूर जहां
भगवान् भी मेरी निगाहों से
आज पुरानी राहों से कोई
मुझे आवाज न दे.

Aaj purani raahon se song lyrics | Sonu Nigam, Aadmi (1968)