Type Here to Get Search Results !

कहाँ तेरा इन्साफ है लिरिक्स | मोहम्मद रफ़ी, सरगम (1979)

जागआँखें खोल चुप क्यों है बोल
मेरे भगवन यह क्या हो रहा है
मेरे भगवन यह क्या हो रहा है

कहाँ  तेरा इन्साफ है
कहाँ  तेरा दस्तूर है
कहाँ  तेरा इन्साफ है
कहाँ  तेरा दस्तूर है
मैं तो हूँ मजबूर ओ भगवन
मैं तो हूँ मजबूर ओ भगवन
क्या तू भी मजबूर है
कहाँ  तेरा इन्साफ है
कहाँ  तेरा दस्तूर है
कहाँ  तेरा इन्साफ है
कहाँ  तेरा दस्तूर है

सब कहते है तूने
हर अबला की लाज बचाई
आज हुआ क्या तुझको
तेरे नाम की राम दुहाई
ऐसा ज़ुल्म हुआ तो होगी
तेरी भी रुस्वाई
तेरी भी रुस्वाई
आँखों में आँसू भरे है
दिल भी ग़म से चुर है
कहाँ  तेरा इन्साफ है
कहाँ  तेरा दस्तूर है
मैं तो हूँ मजबूर ओ भगवन
क्या तू भी मजबूर है
कहाँ  तेरा इन्साफ है
कहाँ  तेरा दस्तूर है

कैसा अत्याचार है
शादी या वयापार है
दौलत में सब ज़ोर है
धरम बड़ा कमजोर है
बिकते है संसार में
इंसा भी बाजार में
दुनिया की यह रीत है
बस पैसे की जीत है
ऐसा अगर नहीं है तो
सच भगवन कही है तो
सच भगवन कही है तो
मेरे सामने आये वो
यह विश्वास दिलाये वो
मेरे सामने आये वो
यह विश्वास दिलाये वो
मेरे सामने आये वो
यह विश्वास दिलाये वो
मेरे सामने आये वो
यह विश्वास दिलाये वो.

Kaha tera insaaf hai song lyrics | Mohd rafi, Sargam (1979)