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ना आदमी का कोई लिरिक्स | सोनू निगम, आदमी (1968)

तेरी मोहब्बत पे शक नहीं है
तेरी वफाओं को मनता हु
मगर तुझे किसकी आरजू है
मैं यह हकीकत भी जानता हूँ

ना आदमी का कोई भरोसा
ना दोस्ती का कोई ठिकाना
वफ़ा का बदला हैं बेवफाई
अजब जमना हैं यह जमाना
ना आदमी का कोई भरोसा

ना हुस्न में अब वह दिलकशी है
ना इश्क में अब वह जिंदगी है
जिधर निगाहें उठके देखो
सितम हैं धोखा हैं बेरुखी है
बदल गए जिन्दगी के नगमे
बिखर गया प्यार का तराना
बदल गए जिन्दगी के नगमे
बिखर गया प्यार का तराना
ना आदमी का कोई भरोसा

दवा के बदले में जहर दे दो
उतार दो मेरे दिल में खंजर
लहू से सींचा था जिस चमन को
उगे हैं शोले उसी के अंदर
मेरे ही घर के चिराग ने खुद
जला दिया मेरा आशियाना
मेरे ही घर के चिराग ने खुद
जला दिया मेरा आशियाना
ना आदमी का कोई भरोसा
ना दोस्ती का कोई ठिकाना
वफ़ा का बदला हैं बेवफाई
अजब जमाना हैं यह जमाना

Na aadami ka koyi bharosa Song Lyrics | Sonu Nigam, Aadmi (1968)