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नीले पर्बतो की धारा लिरिक्स | आशा भोंसले,महेंद्र कपूर,आदमी और इंसान 1969

ओ नीले पर्बतो की धारा
आई ढुंढने किनारा बड़ी दूर से
सब को सहारा चाहिए
कोई हमारा चाहिए

ओ नीले पर्बतो की धारा
आई ढुंढने किनारा बड़ी दूर से
सब को सहारा चाहिए
कोई हमारा चाहिए

फूल में जैसे फूल की खुशबू
दिल में है यूँ तेरा बसेरा
धरती से अम्बर तक फैला
चाहत की बाहों का घेरा

ओ नीले पर्बतो की धारा
आई ढुंढने किनारा बड़ी दूर से
सब को सहारा चाहिए
कोई हमारा चाहिए

सूरज पीछे घूमे धरती
सांझ के पीछे घूमे सवेरा
जिस नाते ने इन को बाँधा
वो नाता है तेरा मेरा

ओ नीले पर्बतो की धारा
आई ढुंढने किनारा बड़ी दूर से
सब को सहारा चाहिए
कोई हमारा चाहिए

ओ नीले पर्बतो की धारा.