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पर्वत के इस पार लिरिक्स | मोहम्मद रफ़ी,लता मंगेशकर, सरगम (1979)

 सा रे गा मा पा धा नि

पर्वत के इस पार
पर्वत के उस पार
गूंज उठी छम
छम छम छम
गूंज उठी छम
छम छम मेरी
पायल की झंकार आ..आ
गूंज उठी छम
छम छम मेरी
पायल की झंकार
पर्वत के इस पार
पर्वत के उस पार
गूंज उठी छम छम
छम मेरी पायल की झंकार
आ..आ

मुख पे पड़ी थी कब
से चुप की ईक ज़ंजीर
मुख पे पड़ी थी कब
से चुप की ईक ज़ंजीर
मंदिर में चुप चाप
कड़ी थी मैं बनके तस्वीर
आ चल गा मैं साथ हूँ तेरे
छेड़ दिए हैं सरस्वती
देवी ने तार सितार
पर्वत के इस पार पर्वत के उस पार
गूंज उठी छम छम
छम तेरी पायल की झंकार

गम एक चिट्ठी जिस में
खुशियों का संदेश
गम एक चिट्ठी जिस में
खुशियों का संदेश
गीत तभी मन से उठता
है जब लगाती है ठेस
आ चल ग मैं साथ हूँ तेरे
लय न टूटे ताल न
टूटे छूटे ये संसार
पर्वत के इस पार पर्वत के उस पार
गूंज उठी छम छम
छम तेरी पायल की झंकार

फूल बने हैं घुंघरू
घुँघरू बन गए फूल
हुल बने हैं घुंघरू
घुँघरू बन गए फूल
तूट के पाँव में सब
कलियाँ बिच गईं बनकर धुल
ता थैया ता ता थैया
देखो झूम के नाच उठी है
मेरे अंग अंग मस्त बहार
पर्वत के इस पार पर्वत के उस पार
गूंज उठी छम छम
छम मेरी पायल की झंकार
आ..आ
गूंज उठी छम छम
छम मेरी पायल की झंकार.