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ज़िन्दगी इतफ़ाक़ है लिरिक्स | आशा भोंसले,महेंद्र कपूर,आदमी और इंसान 1969

ज़िन्दगी इतफ़ाक़ है
ज़िन्दगी इतफ़ाक़ है
कल भी इतफ़ाक़ थी
आज भी इतफ़ाक़ है
ज़िन्दगी इतफ़ाक़ है

जाम पकड़ बढ़ा के
हाथ मांग दुआ घटे न रात
जान ए वफ़ा तेरी क़सम
कहते है दिल की बात हम
गर कोई मेल हो सके
आँखों का खेल हो सके
अपने को खुशनसीब जान
वक़्त को मेहरबाँ मान
मिलते है दिल कभी कभी
वार्ना है अजनबी सभी
मेरे हमदम मेरे मेहरबान
हर ख़ुशी इतफ़ाक़ है
हर ख़ुशी इतफ़ाक़ है
कल भी इतफ़ाक़ थी
आज भी इतफ़ाक़ है
ज़िन्दगी इतफ़ाक़ है

हुस्न है और शबाब है
ज़िन्दगी कामयाब है
बज़्म यूँ ही खिली रहे
अपनी नज़र मिली रहे
रंग यूँ ही जमा रहे
वक़्त यूँ ही थमा रहे
साज़ की लैय पे झूम ले
ज़ुल्फ़ के ख़म को चूम ले
मेरे किए से कुछ नहीं
तेरे किए से कुछ नहीं
मेरे हमदम
मेरे मेहरबान
ये सभी इतफ़ाक़ है
ये सभी इतफ़ाक़ है
कल भी इतफ़ाक़ थी
आज भी इतफ़ाक़ है
ज़िन्दगी इतफ़ाक़ है
ज़िन्दगी इतफ़ाक़ है

कोई तो बात की जिए
यार का साथ दी जिए
कभी गैरों पे अपनों
का गुनाह होता है
कभी अपने भी नजर
आते है बेगनेसे
कभी ख्वाबों में चमकते
है मुरदो के महल
कभी महलों में उभर
आते है विरानो से

कोई रुत भी सजा नहीं क्या
हो कब कुछ पता नहीं
गम फजूल है गम न कर
आज तो जश्न गम न कर
हम दम मेरे महेरबान
हर खुशी इत्तफ़ाक़ है
कल भी इतफ़ाक़ थी
आज भी इतफ़ाक़ है
ज़िन्दगी इतफ़ाक़ है

कोई देखु तो इस कदर
ढूंढती है किसे नजर
आज मालूम हुआ पहले
ये मालूम न था
चाटे भड़के ज़माने
भी हो जाते है अच्छा
दिल के दामन से लिपट
ती हुई रंगीन नज़ारे
देखते देखते अन्जान
भी हो जाती है
देखते देखते अन्जान
भी हो जाती है

यार जब अजनबी बने
यार जब बेरुख़ी बने
दिल पे सहे जा गिला न कर
सबसे हस के मिला नजर
मेरे हम दम महेरबान
दोस्ती इतफ़ाक़ है
कल भी इतफ़ाक़ थी
आज भी इतफ़ाक़ है
ज़िन्दगी इतफ़ाक़ है.